Tapovana-praveśaḥ — The King’s Entry into the Sacred Grove and Vision of the Āśrama
वैशम्पायन उवाच रहस्यं खल्विदं राजन् देवानामिति न: श्रुतम् । तत्तु ते कथयिष्यामि नमस्कृत्य स्वयम्भुवे,वैशम्पायनजीने कहा--राजन्! यह देवताओंका रहस्य है, ऐसा मैंने सुन रखा है। स्वयम्भू ब्रह्माजीको नमस्कार करके आज उसी रहस्यका तुमसे वर्णन करूँगा
Vaiśampāyana uvāca: rahasyaṃ khalv idaṃ rājan devānām iti naḥ śrutam | tat tu te kathayiṣyāmi namaskṛtya svayambhuve ||
वैशम्पायन बोले—राजन्! मैंने सुना है कि यह देवताओं का रहस्य है। स्वयम्भू ब्रह्मा को नमस्कार करके मैं वही रहस्य अब तुमसे कहूँगा।
वैशम्पायन उवाच