Janamejaya’s Request for Expansion; Vaiśampāyana’s Authorization and Phalāśruti of the Mahābhārata
Jaya
सौतिरुवाच जनमेजयेन राज्ञा तु नोदितस्तक्षकं प्रति | होता जुहाव तत्रस्थं तक्षकं पन्नगं तथा,उग्रश्रवाजी कहते हैं--राजा जनमेजयके द्वारा इस प्रकार तक्षककी आहुतिके लिये प्रेरित हो होताने इन्द्रके समीपवर्ती तक्षक नागका अग्निमें आवाहन किया--उसके नामकी आहुति डाली
उग्रश्रवा सूत ने कहा—राजा जनमेजय द्वारा तक्षक के विषय में इस प्रकार प्रेरित किए जाने पर, होता ने वहीं स्थित उस पन्नग तक्षक का अग्नि में आवाहन कर उसके नाम की आहुति दी।
जनमेजय उवाच