आदि पर्व — अध्याय ५५: पाण्डव-कौरववैरस्य संक्षेपवृत्तान्तः
Synopsis of the Pāṇḍava–Kaurava Estrangement
गयस्य यज्ञ: शशबिन्दोश्न राज्ञो यज्ञस्तथा वैश्रवणस्य राज्ञ: । तथा यज्ञोडयं तव भारताग्रय पारिक्षित स्वस्ति नोअस्तु प्रियेभ्य:,भरतवंशियोंमें अग्रगण्य जनमेजय! महाराज गयका यज्ञ, राजा शशबिन्दुका यज्ञ तथा राजाधिराज कुबेरका यज्ञ जिस प्रकार उत्तम विधि-विधानसे सम्पन्न हुआ था, वैसा ही तुम्हारा यह यज्ञ है। हमारे प्रियजनोंका कल्याण हो
Āstīka uvāca: Gayasya yajñaḥ Śaśabindoś ca rājño yajñas tathā Vaiśravaṇasya rājñaḥ | tathā yajño ’yaṃ tava Bhāratāgrya Pārikṣita svasti no ’stu priyebhyaḥ ||
आस्तीक ने कहा— हे भरतवंशियों में अग्रगण्य, जनमेजय! महाराज गय का यज्ञ, राजा शशबिन्दु का यज्ञ तथा राजाधिराज वैश्रवण (कुबेर) का यज्ञ जैसे उत्तम विधि-विधान से सम्पन्न हुए थे, वैसे ही तुम्हारा यह यज्ञ भी है। हमारे प्रियजनों का कल्याण हो।
आस्तीक उवाच