Vyāsa’s Arrival at Janamejaya’s Sarpasatra; Commissioning of Vaiśaṃpāyana’s Recital (व्यासागमनम्)
जरत्कारुर॒वाच पन्नगानामशेषाणां माता कद्रूरिति श्रुता । तया शप्ता रुषितया सुता यस्मान्निबोध तत्
जरत्कारु ने कहा—वत्स! समस्त नागों की माता कद्रू नाम से प्रसिद्ध है। उन्होंने किसी समय क्रुद्ध होकर अपने पुत्रों को शाप दे दिया था। जिस कारण से वह शाप दिया गया, वह बताती हूँ—सुनो।
आस्तीक उवाच