Vyāsa’s Arrival at Janamejaya’s Sarpasatra; Commissioning of Vaiśaṃpāyana’s Recital (व्यासागमनम्)
अहं तव पितु: पुत्र भ्रात्रा दत्ता निमित्तत: । काल: स चायं सम्प्राप्तस्तत् कुरुष्व यथातथम्
बेटा! मेरे भैया ने एक निमित्त को लेकर तुम्हारे पिता के साथ मेरा विवाह किया था। उसकी पूर्ति का यही उपयुक्त अवसर आया है; अतः तुम यथावत् उस उद्देश्य की पूर्ति करो।
शौनक उवाच