भृगुवंश-प्रस्तावना तथा पुलोमा–अग्नि-संवादः
Bhrigu Lineage Preface and the Pulomā–Agni Dialogue
सौतिर्वाच एवं रक्षस्तमामन्त्रय ज्वलितं जातवेदसम् । शड्कमानं भृगोर्भार्या पुनः पुनरपृच्छत,उग्रश्रवाजी कहते हैं--इस प्रकार वह राक्षस भृगुकी पत्नीके प्रति, यह मेरी है या भगुकी--ऐसा संशय रखते हुए, प्रज्वलित अग्निको सम्बोधित करके बार-बार पूछने लगा --
sautir uvāca evaṁ rakṣas tam āmantrya jvalitaṁ jātavedasam | śaṅkamānaṁ bhṛgor bhāryā punaḥ punaḥ apṛcchata ||
सौति बोले— “इस प्रकार वह राक्षस प्रज्वलित जातवेद अग्नि को सम्बोधित करके, भृगु की पत्नी के विषय में संशय करता हुआ, बार-बार पूछने लगा।”
शौनक उवाच