Āstīka’s Commission and Approach to Janamejaya’s Sarpa-satra (आस्तीक-प्रेषणं यज्ञप्रवेशोपक्रमश्च)
सौतिर्वाच शणु ब्रह्मन् यथापृच्छन्मन्त्रिणो नृपतिस्तदा । यथा चाख्यातवन्तस्ते निधनं तत् परीक्षित:,उग्रश्रवाजीने कहा--ब्रह्मन! सुनिये, उस समय राजाने मन्त्रियोंसे जो कुछ पूछा और उन्होंने परीक्षितकी मृत्युके सम्बन्धमें जैसी बातें बतायीं, वह सब मैं सुना रहा हूँ
सौति बोले—“हे ब्रह्मन्! सुनिए। उस समय नृपति ने मन्त्रियों से जो कुछ पूछा था, और उन्होंने परीक्षित की मृत्यु के विषय में जैसा वर्णन किया था—वह सब मैं सुनाता हूँ।”
शौनक उवाच