Āstīka’s Commission and Approach to Janamejaya’s Sarpa-satra (आस्तीक-प्रेषणं यज्ञप्रवेशोपक्रमश्च)
परीक्षिदभवत् तेन सौभद्रस्यात्मजो बली । राजधर्मार्थकुशलो युक्त: सर्वगुणैर्वत:,वे महायशस्वी महाराज सम्पूर्ण जगतके प्रेमपात्र थे। जब कुरुकुल परिक्षीण (सर्वथा नष्ट) हो चला था, उस समय उत्तराके गर्भसे उनका जन्म हुआ। इसलिये वे महाबली अभिमन्युकुमार परीक्षित् नामसे विख्यात हुए। राजधर्म और अर्थनीतिमें वे अत्यन्त निपुण थे। समस्त सदगुणोंने स्वयं उनका वरण किया था। वे सदा उनसे संयुक्त रहते थे
parīkṣid abhavat tena saubhadrasyātmajo balī | rājadharmārthakuśalo yuktaḥ sarvaguṇair vataḥ ||
इस प्रकार सौभद्र (अभिमन्यु) का बलवान पुत्र परीक्षित उत्पन्न हुआ—जो राजधर्म और अर्थनीति में निपुण तथा समस्त गुणों से युक्त था।
जनमेजय उवाच