Jaradkāru Encounters the Pitṛs
Jaratkāru-Pitṛdarśana
दुःखाच्चाश्रूणि मुमुचे पितरं चेदमब्रवीत् । श्र॒ुत्वेमां धर्षणां तात तव तेन दुरात्मना,वह दुःखसे आँसू बहाने लगा। उसने पितासे कहा--“'तात! उस दुरात्मा राजा परीक्षितके द्वारा आपके इस अपमानकी बात सुनकर मैंने उसे क्रोधपूर्वक जैसा शाप दिया है, वह कुरुकुलाधम वैसे ही भयंकर शापके योग्य है। आजके सातवें दिन नागराज तक्षक उस पापीको अत्यन्त भयंकर यमलोकमें पहुँचा देगा।” ब्रह्मन्! इस प्रकार क्रोधमें भरे हुए पुत्रसे उसके पिता शमीकने कहा
duḥkhāc cāśrūṇi mumuce pitaraṃ cedam abravīt | śrutvemāṃ dharṣaṇāṃ tāta tava tena durātmanā ||
दुःख से उसके आँसू बह निकले और उसने अपने पिता से कहा—“तात! उस दुरात्मा ने जो आपका अपमान किया, वह सुनकर मैंने क्रोध में आकर उसे शाप दे दिया है।”
कृश उवाच