Nāga-prādhānya-nāma-kathana
Principal Nāga Names Enumerated
इन्द्राच्छतगुण: शौर्ये वीर्ये चैव मनोजव: । तपसो न: फलेनाद्य दारुण: सम्भवत्विति,'शौर्य और वीर्यमें इन्द्रसे वह सौगुना बढ़कर हो। उसका वेग मनके समान तीव्र हो। हमारी तपस्याके फलसे अब ऐसा ही वीर प्रकट हो जो इन्द्रके लिये भयंकर हो”
śaunaka uvāca |
indrāc chataguṇaḥ śaurye vīrye caiva manojavaḥ |
tapaso naḥ phalenādya dāruṇaḥ sambhavattv iti ||
शौनक बोले—“शौर्य और वीर्य में वह इन्द्र से सौगुना बढ़कर हो; उसका वेग मन के समान तीव्र हो। हमारी तपस्या के फल से आज ऐसा दारुण वीर उत्पन्न हो, जो इन्द्र के लिए भी भयङ्कर हो।”
शौनक उवाच