Vālakhilya-Tapas and the Birth of Garuḍa (वालखिल्यतपः-गरुडोत्पत्तिः)
तत् ते वनं समासाद्य विजहु: पन्नगास्तदा । अब्रुवंश्व महावीर्य सुपर्ण पतगेश्वरम्,उस वनमें पहुँचकर वे सर्प उस समय सब ओर विहार करने लगे और महापराक्रमी पक्षिराज गरुडसे इस प्रकार बोले--
tat te vanaṃ samāsādya vijahuḥ pannagās tadā | abruvaṃś ca mahāvīrya suparṇa patageśvaram ||
उस वन में पहुँचकर वे सर्प उस समय चारों ओर स्वच्छन्द विहार करने लगे। तब उन्होंने महापराक्रमी पक्षिराज सुपर्ण—गरुड़—से इस प्रकार कहा।
पितामह उवाच