शाडुर्गका ऊचु: न द्वतं तं वयं विद्य: श्येनेनाखुं कथंचन । अन्ये5डपि भवितारोजअत्र तेभ्योडपि भयमेव न:,शार्ड्गक बोले--हम किसी तरह यह नहीं समझ सकते कि बाज चूहेको उठा ले गया। उस बिलनमें दूसरे चूहे भी तो हो सकते हैं; हमारे लिये तो उनसे भी भय ही है
Śāḍūrgakā ūcuḥ: na dṛṣṭaṃ taṃ vayaṃ vidmaḥ śyenena ākhūṃ kathaṃcana | anye ’pi bhavitāro ’tra tebhyo ’pi bhayam eva naḥ ||
शाडूर्गक बोले—हमने तो उसे देखा ही नहीं; हम किसी तरह नहीं जानते कि बाज चूहे को उठा ले गया। और इस बिल में दूसरे चूहे भी हो सकते हैं; उनसे भी हमें भय ही है।
वैशम्पायन उवाच