त्वदृते हि जगत् कृत्स्नं सद्यो नश्येद् हुताशन । तुभ्यं कृत्वा नमो विप्रा: स्वकर्मविजितां गतिम्
tvadṛte hi jagat kṛtsnaṃ sadyo naśyed hutāśana | tubhyaṃ kṛtvā namo viprāḥ svakarmavijitāṃ gatim ||
हे हुताशन! आपके बिना यह समस्त जगत् क्षणभर में नष्ट हो जाए। इसलिए ब्राह्मणजन आपको नमस्कार करके, अपने कर्म-धर्म के पुण्य से प्राप्त होने वाली कल्याणमयी गति को पाते हैं।
मन्दपाल उवाच