अग्निभय-प्रसङ्गे मन्दपालस्य शोकः
Mandapāla’s Lament amid the Threat of Fire
पाण्डुराभ्रप्रतीकाशैर्मनोवायुसमैर्जवे । सर्वोपकरणैर्युक्तमजय्यं देवदानवै:,उनकी कान्ति सफेद बादलोंकी-सी जान पड़ती थी। वे वेगमें मन और वायुकी समानता करते थे। वह रथ सम्पूर्ण आवश्यक वस्तुओंसे युक्त तथा देवताओं और दानवोंके लिये भी अजेय था
pāṇḍurābhra-pratīkāśair manovāyu-samair jave | sarvopakaraṇair yuktam ajayyaṁ deva-dānavaiḥ ||
वैशम्पायन बोले—उसकी कान्ति पाण्डु मेघों के समान थी। वेग में वह मन और वायु के तुल्य था। समस्त उपकरणों से युक्त वह रथ देवताओं और दानवों के लिए भी अजेय था।
वैशम्पायन उवाच