खाण्डवदाहे देवविमुखता तथा मयदानवाभयदानम् | Khāṇḍava Burning: Devas Withdraw; Maya Granted Protection
सुभद्रा त्वथ शैलेन्द्रम भ्यर्च्यैव हि रैवतम् । देवतानि च सर्वाणि ब्राह्मणान् स्वस्ति वाच्य च,उधर सुभद्रा गिरिराज रैवतक तथा सब देवताओंकी पूजा करके ब्राह्मणोंसे स्वस्तिवाचन कराकर पर्वतकी परिक्रमा पूरी करके द्वारकाकी ओर लौट रही थी। अर्जुन कामदेवके बाणोंसे अत्यन्त पीड़ित हो रहे थे। उन्होंने दौड़कर सर्वांगसुन्दरी सुभद्राको बलपूर्वक रथपर बिठा लिया
subhadrā tv atha śailendram abhyarcyaiva hi raivatam | devatāni ca sarvāṇi brāhmaṇān svasti vācya ca ||
वैशम्पायन बोले— तब सुभद्रा ने शैलेन्द्र रैवतक की विधिपूर्वक पूजा की, समस्त देवताओं को नमस्कार किया और ब्राह्मणों से स्वस्तिवाचन कराया।
वैशम्पायन उवाच