Ādi-parva Adhyāya 209: Śaraṇāgati of the Cursed Apsarases; Nārītīrtha-prasiddhi; Arjuna’s Vimocana
प्रभिन्नकरटौ मत्तौ भूत्वा कुड्जरखूपिणौ । संलीनमपि दुर्गेषु निन्यतुर्यमसादनम्,कठिन-से-कठिन स्थानमें छिपे हुए मुनिको भी वे मद बहानेवाले मतवाले हाथीका रूप धारण करके यमलोक पहुँचा देते थे
prabhinnakaraṭau mattau bhūtvā kuñjararūpiṇau | saṁlīnam api durgeṣu ninyatur yamasādanam ||
वे मद बहाते, मतवाले हाथियों का रूप धारण करके, दुर्गम स्थानों में छिपे हुए मुनि को भी खींचकर यमसदन पहुँचा देते थे।
नारद उवाच