Tilottamā, Sunda–Upasunda, and the Pāṇḍava Samaya (Ādi Parva 204)
ट्रुपदो5पि महान् राजा कृतवैरश्न नः पुरा । तस्य संग्रहणं राजन् स्वपक्षस्य विवर्धनम्,राजन! ट्रुपद भी बहुत बड़े राजा हैं और पहले हमारे साथ उनका वैर भी हो चुका है। अतः मित्रके रूपमें उनका संग्रह हमारे अपने पक्षकी वृद्धिका कारण होगा
trupado 'pi mahān rājā kṛtavairaś ca naḥ purā | tasya saṅgrahaṇaṃ rājan svapakṣasya vivardhanam ||
विदुर बोले—राजन्! द्रुपद भी महान् राजा हैं और पहले हमारा उनसे वैर हो चुका है। इसलिए उन्हें मित्र रूप में अपने पक्ष में कर लेना हमारे पक्ष की वृद्धि का कारण होगा।
विदुर उवाच