समन्तपञ्चक-आख्यानम् तथा अक्षौहिणी-प्रमाणनिर्णयः
Samantapañcaka Narrative and the Measure of an Akṣauhiṇī
कुण्डलाहरणं पर्व ततः परमिहोच्यते । आरणेयं ततः पर्व वैराटं तदनन्तरम् | पाण्डवानां प्रवेशश्व॒ समयस्य च पालनम्,इसके बाद क्रमश: कुण्डलाहरण और आरणेय-पर्व कहे गये हैं। तदनन्तर विराटपर्वका आरम्भ होता है, जिसमें पाण्डवोंके नगरप्रवेश और समयपालन-सम्बन्धीपर्व हैं
kuṇḍalāharaṇaṃ parva tataḥ param ihocyate | āraṇeyaṃ tataḥ parva vairāṭaṃ tad-anantaram | pāṇḍavānāṃ praveśaś ca samayasya ca pālanam |
इसके बाद ‘कुण्डलाहरण’ पर्व कहा गया है। फिर ‘आरणेय’ पर्व और उसके अनन्तर ‘विराट’ पर्व आता है। विराट-पर्व में पाण्डवों का प्रवेश तथा समय-पालन का वर्णन है।
राम उवाच