समन्तपञ्चक-आख्यानम् तथा अक्षौहिणी-प्रमाणनिर्णयः
Samantapañcaka Narrative and the Measure of an Akṣauhiṇī
पुनर्द्धतवनं चैव पाण्डवा: समुपागता: । घोषयात्रा च गन्धर्वर्यत्र बद्ध: सुयोधन:,तदनन्तर धर्मात्मा पाण्डव पुन: द्वैतवनमें आये। कौरवोंने घोषयात्रा की और गन्धर्वोने दुर्योधनको बन्दी बना लिया
punar Dvaitavanaṃ caiva Pāṇḍavāḥ samupāgatāḥ | ghoṣayātrā ca gandharvair yatra baddhaḥ Suyodhanaḥ ||
तदनन्तर पाण्डव पुनः द्वैतवन में आये। वहीं कौरवों ने घोषयात्रा की, और वहीं गन्धर्वों ने सुयोधन (दुर्योधन) को बन्दी बना लिया।
राम उवाच