समन्तपञ्चक-आख्यानम् तथा अक्षौहिणी-प्रमाणनिर्णयः
Samantapañcaka Narrative and the Measure of an Akṣauhiṇī
भीमस्य ग्रहणं चात्र पर्वताभोगवर्ष्मणा । भुजगेन्द्रेण बलिना तस्मिन् सुगहने वने,फिर एक बीहड़ वनमें पर्वतके समान विशाल शरीरधारी बलवान् अजगरने भीमसेनको पकड़ लिया
bhīmasya grahaṇaṃ cātra parvatābhogavarṣmaṇā | bhujagendreṇa balinā tasmin sugahane vane ||
वहाँ उस घने और दुर्गम वन में पर्वत-सा विशाल देहधारी बलवान् नागराज ने भीमसेन को पकड़ लिया।
राम उवाच