समन्तपञ्चक-आख्यानम् तथा अक्षौहिणी-प्रमाणनिर्णयः
Samantapañcaka Narrative and the Measure of an Akṣauhiṇī
अध्यायानां शते द्वे तु संख्याते परमर्षिणा । सप्तविंशतिरथ्याया व्यासेनोत्तमतेजसा,परमर्षि एवं परम तेजस्वी महर्षि व्यासने इस पर्वमें दो सौ सत्ताईस (२२७) अध्यायोंकी रचना की है
adhyāyānāṁ śate dve tu saṅkhyāte paramarṣiṇā | saptaviṁśatir adhyāyā vyāsena uttama-tejasā ||
परमर्षि ने अध्यायों की संख्या दो सौ बताई है, और उत्तम तेजस्वी महर्षि व्यास ने सत्ताईस अध्याय और रचे हैं। इस प्रकार इस पर्व में कुल दो सौ सत्ताईस (२२७) अध्याय हैं।
राम उवाच