समन्तपञ्चक-आख्यानम् तथा अक्षौहिणी-प्रमाणनिर्णयः
Samantapañcaka Narrative and the Measure of an Akṣauhiṇī
सम्प्राप्तिश्नक्रधनुषो: खाण्डवस्य च दाहनम् | मयस्य मोक्षो ज्वलनाद् भुजड़स्य च मोक्षणम्,इसके पश्चात् द्रौपदीके पुत्रोंकी उत्पत्तिकी कथा है। तदनन्तर जब श्रीकृष्ण और अर्जुन यमुनाजीके तटपर विहार करनेके लिये गये हुए थे, तब उन्हें जिस प्रकार चक्र और धनुषकी प्राप्ति हुई, उसका वर्णन है। साथ ही खाण्डववनके दाह, मयदानवके छुटकारे और अग्निकाण्डसे सर्पके सर्वथा बच जानेका वर्णन हुआ है
samprāptiḥ śakradhanuṣoḥ khāṇḍavasya ca dāhanam | mayasya mokṣo jvalanād bhujaṅgasya ca mokṣaṇam |
यहाँ वर्णन है कि यमुना-तट पर विहार करते हुए श्रीकृष्ण और अर्जुन को चक्र तथा इन्द्र का धनुष (गाण्डीव) कैसे प्राप्त हुआ; फिर खाण्डववन का दाह, दानव मय का अग्नि से उद्धार, और उस महादाह से एक सर्प का पूर्णतः बच निकलना भी कहा गया है।
राम उवाच