Bhīṣma’s Counsel on Reconciliation and Partition (भीष्मोपदेशः—संधि-राज्यविभागविचारः)
कुन्त्युवाच एवमेतद् यथा प्राह धर्मचारी युधिष्ठिर: । अनृतान्मे भयं तीव्र मुच्येडहमनृतात् कथम्,कुन्तीने कहा--धर्मका आचरण करनेवाले युधिष्ठिरने जैसा कहा है, वह ठीक है। (अवश्य मैंने द्रौपदीके साथ पाँचों भाइयोंके विवाहसम्बन्धकी आज्ञा दे दी है।) मुझे झूठसे बहुत भय लगता है; बताइये, मैं झूठके पापसे कैसे बच सकूँगी?
kunty uvāca: evam etad yathā prāha dharmacārī yudhiṣṭhiraḥ | anṛtān me bhayaṃ tīvraṃ mucyed aham anṛtāt katham ||
कुन्ती ने कहा—धर्म का आचरण करने वाले युधिष्ठिर ने जैसा कहा है, वैसा ही है। पर मुझे असत्य का तीव्र भय है; बताइए, मैं झूठ के पाप से कैसे मुक्त होऊँ?
युधिछिर उवाच