द्रौपदी-वरण-प्रत्ययः — Intelligence Reports and the Kaurava Court’s Response
तत्रोपविष्टार्चिरिवानलस्य तेषां जनित्रीति मम प्रतर्क: । तथाविधैरेव नरप्रवीरै- रुपोपविष्टैस्त्रिभिरग्निकल्पै:,उस घरमें अग्निशिखाके समान तेजस्विनी एक स्त्री बैठी हुई थीं। मेरा अनुमान है कि वे उन वीरोंकी माता रही होंगी। उनके आस-पास अग्नितुल्य तेजस्वी वैसे ही तीन श्रेष्ठ नरवीर और बैठे हुए थे >> |
tatro'paviṣṭārcir ivānalasya teṣāṃ janitrīti mama pratarkaḥ | tathāvidhair eva narapravīrair upopaviṣṭais tribhir agnikalpaiḥ ||
वहाँ अग्निशिखा के समान तेजस्विनी एक स्त्री बैठी थी; मेरा अनुमान है कि वही उन वीरों की जननी होगी। उसके पास ही अग्नि-तुल्य तेज वाले वैसे ही तीन श्रेष्ठ नरवीर भी बैठे थे।
धृष्टह्ुम्न उवाच