द्रौपदी-वरण-प्रत्ययः — Intelligence Reports and the Kaurava Court’s Response
सोते समय वे वर्षाकालके मेघके समान गम्भीर गर्जना करते हुए आपसमें बड़ी विचित्र बातें करने लगे। वे पाँचों वीर जो बातें कह रहे थे, वे वैश्यों, शूद्रों तथा ब्राह्मणों-जैसी नहीं थीं
sote samaye te varṣākālike megha-samānāṁ gambhīra-garjanāṁ kurvantaḥ parasparaṁ baḍī vicitra bāteṁ karane lage | te pāñcoṁ vīrā ye bāteṁ kah rahe the, ve vaiśya-śūdra-tathā brāhmaṇa-sadṛśī na thīṁ |
सोते समय वे पाँचों वीर वर्षाकाल के मेघों-सी गम्भीर गर्जना करते हुए आपस में अद्भुत बातें करने लगे। उनके वचन न वैश्य-शूद्रों की साधारण बोली जैसे थे, न ही ब्राह्मणों की रीति के—उनमें असामान्य तेज, उद्देश्य और वीर-धर्म की छाप थी।
धृष्टह्ुम्न उवाच