Ādi-parva, Adhyāya 187: Drupada’s Inquiry and the Dharma Debate on Draupadī’s Marriage
प्रणम्य शिरसा देवमीशानं वरदं प्रभुम् कृष्णं च मनसा कृत्वा जगृहे चार्जुनो धनु:,इसके बाद वरदायक भगवान् शंकरको मस्तक झुकाकर प्रणाम किया और मन-ही-मन भगवान् श्रीकृष्णका चिन्तन करके अर्जुनने वह धनुष उठा लिया
praṇamya śirasā devam īśānaṁ varadaṁ prabhum | kṛṣṇaṁ ca manasā kṛtvā jagṛhe cārjuno dhanuḥ ||
तब अर्जुन ने वरदायक प्रभु ईशान देव शंकर को सिर झुकाकर प्रणाम किया और मन में श्रीकृष्ण का स्मरण करके वह धनुष उठा लिया।
वैशम्पायन उवाच