अर्जुनस्य लक्ष्यवेधः
Arjuna’s Hitting of the Target at the Svayaṃvara
ततस्तं पितरस्तात विज्ञाय कुलनन्दनम् । पितृलोकादुपागम्य सर्व ऊचुरिदं वच:,तात! तदनन्तर सभी पितरोंने अपने कुलका आनन्द बढ़ानेवाले और्व मुनिका वह निश्चय जानकर पितृलोकसे आकर यह बात कही
tatas taṃ pitaras tāta vijñāya kulanandanam | pitṛlokād upāgamya sarva ūcur idaṃ vacaḥ ||
तब पितरों ने, उसे—हे तात—कुल का आनन्द बढ़ानेवाला जानकर, पितृलोक से आकर सबने उससे ये वचन कहे।
वसिष्ठ उवाच