धृष्टद्युम्नेन समागतक्षत्रियगणगणना
Dhṛṣṭadyumna’s Enumeration of Assembled Kṣatriyas
अथ शुश्राव संगत्या वेदाध्ययननि:स्वनम् । पृष्ठत: परिपूर्णार्थ षड़भिरज्जैरलंकृतम्,मुनिको पीछेकी ओरसे संगतिपूर्वक छहों अंगोंसे अलंकृत तथा स्फुट अर्थोसे युक्त वेदमन्त्रोंके अध्ययनका शब्द सुन पड़ा
atha śuśrāva saṃgatyā vedādhyayana-niḥsvanam | pṛṣṭhataḥ paripūrṇārthaṃ ṣaḍbhir aṅgair alaṅkṛtam ||
तब उन्होंने पीछे की ओर से संगति-युक्त, स्वर-लय से युक्त वेदाध्ययन का निनाद सुना—जो स्फुट अर्थों से परिपूर्ण था और वेद के षडङ्गों से अलंकृत था।
गन्धर्व उवाच