कल्माषपाद-शाप-कारणम्
Cause of Kalmāṣapāda’s Niyoga under a Curse
सहस्रांशुं ततो विप्र: कृताञज्जलिरुपस्थित: । वसिष्ठो5हमिति प्रीत्या स चात्मानं न्यवेदयत्
तब विप्र वसिष्ठ दोनों हाथ जोड़कर सहस्रों किरणों से सुशोभित भगवान् सूर्यदेव के समीप पहुँचे और ‘मैं वसिष्ठ हूँ’—ऐसा कहकर प्रसन्नतापूर्वक अपना परिचय निवेदित किया।
गन्धर्व उवाच