और्वोपाख्यानम्
Aurva Episode: Restoration of Sight and Restraint of World-Destructive Anger
गन्धर्व उवाच जितोऊहं पूर्वक॑ नाम मुज्चाम्यड्रारपर्णताम् । न च श्लाघे बलेनाड़ न नाम्ना जनसंसदि,गन्धर्वने कहा--अर्जुन! मैं परास्त हो गया, अत: अपने पहले नाम अंगारपर्णको छोड़ देता हूँ। अब मैं जनसमुदायमें अपने बलकी श्लाघा नहीं करूँगा और न इस नामसे अपना परिचय ही दूँगा
गन्धर्व ने कहा—“अर्जुन! मैं पराजित हो गया हूँ, इसलिए अपना पूर्व नाम ‘अंगारपर्ण’ छोड़ता हूँ। अब मैं जनसभा में न अपने बल की श्लाघा करूँगा, न इसी नाम से अपना परिचय दूँगा।”
गन्धर्व उवाच