Kalmāṣapāda’s Encounter with Śakti and the Escalation of the Vasiṣṭha–Viśvāmitra Feud (कल्माषपाद–शक्ति प्रसङ्गः)
द्रोण उदाच अस्त्राणि चैव सर्वाणि तेषां संहारमेव च । प्रयोगं चैव सर्वेषां दातुमहति मे भवान्,द्रोण बोले--भगवन्! आप मुझे सम्पूर्ण अस्त्र तथा उन सबके प्रयोग और उपसंहारकी विधि भी प्रदान करें
droṇa uvāca astrāṇi caiva sarvāṇi teṣāṁ saṁhāram eva ca | prayogaṁ caiva sarveṣāṁ dātum arhati me bhavān ||
द्रोण बोले— भगवन्! आप मुझे समस्त अस्त्र तथा उन सबके उपसंहार की विधि भी दें। और प्रत्येक के प्रयोग की रीति भी मुझे प्रदान करें।
राम उवाच