वसिष्ठ-प्रशंसा
Vasiṣṭha as Purohita: Ascetic Mastery and Royal Counsel
एवं पृष्ट: स बहुशो रक्षमाणश्व पाण्डवान् । उवाच नागरान् सर्वानिदं विप्रर्षभस्तदा,इस प्रकार उनके बार-बार पूछनेपर उस श्रेष्ठ ब्राह्मणने पाण्डवोंको गुप्त रखते हुए समस्त नागरिकोंसे इस प्रकार कहा--
evaṁ pṛṣṭaḥ sa bahuśo rakṣamāṇaś ca pāṇḍavān | uvāca nāgarān sarvān idaṁ viprarṣabhas tadā ||
बार-बार पूछे जाने पर वह श्रेष्ठ ब्राह्मण पाण्डवों की गोपनीयता की रक्षा करते हुए समस्त नगरवासियों से इस प्रकार बोला।
वैशम्पायन उवाच