तापती–संवरणोपाख्यानम्
The Tapatī–Saṃvaraṇa Episode: Meaning of “Tāpatya”
राजानं प्रथम विन्देत् ततो भार्या ततो धनम् | त्रयस्य संचयेनास्य ज्ञातीन् पुत्रांश्व तारयेत्,नीति कहती है, पहले अच्छे राजाको प्राप्त करे। उसके बाद पत्नीकी और फिर धनकी उपलब्धि करे। इन तीनोंके संग्रहद्वारा अपने जाति-भाइयों तथा पुत्रोंकी संकटसे बचाये
rājānaṃ prathamaṃ vindet tato bhāryā tato dhanam | trayasya saṃcayenāsya jñātīn putrāṃś ca tārayet ||
ब्राह्मण ने कहा—पहले उत्तम राजा (सुशासन-रक्षा) का आश्रय प्राप्त करे, फिर पत्नी (गृहस्थ-धर्म की व्यवस्था), और उसके बाद धन। इन तीनों का संग्रह करके मनुष्य अपने कुटुम्बियों और पुत्रों को संकट से पार उतारे।
ब्राह्मण उवाच