Ādi Parva, Adhyāya 158 — Aṅgāraparṇa-saṃvāda and Gaṅgā-tīrtha Saṃghaṭṭa
Encounter at the Gaṅgā ford
स कुरुष्व मया कार्य तारयात्मानमात्मना । अनुजानीहि मामार्य सुतौ मे परिपालय,आर्य! अतः आप मेरे द्वारा अभीष्ट कार्यकी सिद्धि कीजिये और स्वयं प्रयत्न करके अपनेको इस संकटसे बचाइये। मुझे राक्षसके पास जानेकी आज्ञा दीजिये और मेरे दोनों बच्चोंका पालन कीजिये
sa kuruṣva mayā kāryaṁ tārayātmānam ātmanā | anujānīhi mām ārya sutau me paripālaya, ārya! |
ब्राह्मण ने कहा— अतः मेरे अभिप्रेत कार्य को सिद्ध कीजिए और अपने ही प्रयत्न से इस संकट से स्वयं को उबारिए। आर्य! मुझे राक्षस के पास जाने की आज्ञा दीजिए और मेरे दोनों बच्चों का पालन-रक्षण कीजिए।
ब्राह्मण उवाच