Ādi-parva Adhyāya 141: Bhīma–Hiḍimba Confrontation and Protective Discourse
गुणै: समुदितान् दृष्टवा पौरा: पाण्डुसुतांस्तदा । कथयांचक्रिरे तेषां गुणान् संसत्सु भारत,भारत! उन दिनों पाण्डवोंको सर्वगुणसम्पन्न देख नगरके निवासी भरी सभाओंमें उनके सदगुणोंकी प्रशंसा करते थे
guṇaiḥ samuditān dṛṣṭvā paurāḥ pāṇḍusutāṁs tadā | kathayāṁ cakrire teṣāṁ guṇān saṁsatsu bhārata ||
उन दिनों पाण्डु-पुत्रों को सर्वगुणसम्पन्न देखकर नगरवासी, हे भारत, भरी सभाओं में उनके सद्गुणों की प्रशंसा करने लगे।
वैशम्पायन उवाच