भीमस्य जलान्वेषणं तथा वनविश्रान्तिः
Bhīma’s Search for Water and the Forest Halt
पज्चालराजं ट्रुपदं गृहीत्वा रणमूर्धनि । पर्यानयत भद्र व: सा स्थात् परमदक्षिणा,'शिष्यो! पंचालराज ट्रुपदको युद्धमें कैद करके मेरे पास ले आओ। तुम्हारा कल्याण हो। यही मेरे लिये सर्वोत्तम गुरुदक्षिणा होगी”
Pañcālarājaṃ Drupadaṃ gṛhītvā raṇamūrdhani | paryānayata bhadra vaḥ sā syāt paramadakṣiṇā ||
“शिष्यो! रणभूमि में पंचालराज द्रुपद को पकड़कर मेरे पास ले आओ। तुम्हारा कल्याण हो। यही मेरे लिए सर्वोत्तम गुरुदक्षिणा होगी।”
वैशम्पायन उवाच