आदि पर्व — जातुगृह-प्रसङ्गः: विदुरप्रेषित-खनकस्य सूचना तथा पलायन-मार्ग-निर्माणम्
Adi Parva 135: The Miner’s Warning and Construction of the Escape Passage
रड्गस्यैवं मतिरभूत् क्षणेन वसुधाधिप । द्वारं चाभिमुखा: सर्वे बभूवु: प्रेक्षकास्तदा,राजन्! उस रंगमण्डपमें बैठे हुए लोगोंके मनमें क्षणभरमें उपर्युक्त विचार आने लगे। उस समय सभी दर्शक दरवाजेकी ओर मुँह घुमाकर देखने लगे
raṅgasyaivaṃ matir abhūt kṣaṇena vasudhādhipa | dvāraṃ cābhimukhāḥ sarve babhūvuḥ prekṣakās tadā rājān ||
वैशम्पायन बोले—हे वसुधाधिप! उस रंगमण्डप में बैठे लोगों के मन में क्षणभर में ऐसे ही विचार उठे। तब, हे राजन्, सभी दर्शक द्वार की ओर मुख करके देखने लगे।
वैशम्पायन उवाच