Vāraṇāvatāgamana: Public Farewell, Vidura’s Coded Counsel, and Departure
असामान्यमिदं तात लोकेष्वस्त्रं निगद्यते । तद् धारयेथा: प्रयत: शृणु चेदं वचो मम,“तात! यह अस्त्र तीनों लोकोंमें असाधारण बताया गया है। तुम मन और इन्द्रियोंको संयममें रखकर इस अस्त्रको धारण करो और मेरी यह बात सुनो
asāmānyam idaṃ tāta lokeṣv astraṃ nigadyate | tad dhārayethāḥ prayataḥ śṛṇu cedaṃ vaco mama ||
वैशम्पायन बोले— “तात! यह अस्त्र तीनों लोकों में असाधारण कहा गया है। इसलिए मन-इन्द्रियों को संयम में रखकर इसे धारण करना; और मेरी यह बात ध्यान से सुनो।”
वैशम्पायन उवाच