Vāraṇāvata-prasaṃsā and the Pāṇḍavas’ Departure (वरणावत-प्रशंसा तथा पाण्डव-प्रयाणम्)
वैशम्पायन उवाच तथेत्युक्त्वा च गत्वा च भीष्ममूचु: कुमारका:,वैशम्पायनजी कहते हैं--“बहुत अच्छा” कहकर वे कुमार भीष्मजीके पास गये और ब्राह्यणकी सच्ची बातों तथा उनके उस अद्भुत पराक्रमको भी उन्होंने भीष्मजीसे कह सुनाया। कुमारोंकी बातें सुनकर भीष्मजी समझ गये कि वे आचार्य द्रोण हैं
Vaiśampāyana uvāca: tathety uktvā ca gatvā ca Bhīṣmam ūcuḥ kumārakāḥ.
वैशम्पायन ने कहा—“बहुत अच्छा” कहकर वे कुमार भीष्म के पास गए और उस ब्राह्मण के सत्य वचनों तथा उसके अद्भुत पराक्रम का वृत्तांत भीष्म को सुनाया। कुमारों की बात सुनकर भीष्म समझ गए कि वह ब्राह्मण आचार्य द्रोण ही हैं।
वैशम्पायन उवाच