धृतराष्ट्र–दुर्योधन संवादः
Vāraṇāvata-vivāsana-nīti: Dhṛtarāṣṭra and Duryodhana’s Policy Dialogue
प्रतिगृहा तु तत्सवव कृतास्त्रो द्विजसत्तम: | प्रियं सखायं सुप्रीतो जगाम द्रुपदं प्रति,वह सब ग्रहण करके द्विजश्रेष्ठ द्रोण अस्त्र-विद्याके पूरे पण्डित हो गये और अत्यन्त प्रसन्न हो अपने प्रिय सखा ट्रपदके पास गये
pratigṛhya tu tat sarvaṁ kṛtāstro dvijasattamaḥ | priyaṁ sakhāyaṁ suprīto jagāma drupadaṁ prati ||
वह सब ग्रहण करके द्विजश्रेष्ठ द्रोण अस्त्रविद्या में पूर्ण निपुण हो गए; और अत्यन्त प्रसन्न होकर अपने प्रिय सखा द्रुपद के पास गए।
राम उवाच