Droṇa’s Ācārya-Dakṣiṇā: Capture of Drupada and Division of Pāñcāla (द्रोण-आचार्यदक्षिणा)
स निःसज्रो जलस्यान्तमथ वै पाण्डवोडविशत् । आक्रामन्नागभवने तदा नागकुमारकान्,भीमसेन बेहोशीकी ही दशामें जलके भीतर डूबकर नागलोकमें जा पहुँचे। उस समय कितने ही नागकुमार उनके शरीरसे दब गये। तब बहुत-से महाविषधर नागोंने मिलकर अपनी भयंकर विषवाली बड़ी-बड़ी दाढ़ोंसे भीमसेनको खूब डँसा
sa niḥsajro jalasyāntam atha vai pāṇḍavo 'daviśat | ākrāmann āgabhavane tadā nāgakumārakān |
वैशम्पायन बोले—पाण्डव भीम जल के भीतर गहराई में डूबते चले गए और नागों के लोक में जा पहुँचे। नाग-भवन में प्रवेश करते समय उनके शरीर के भार से अनेक नागकुमार दब गए। तब बहुत-से महाविषधर नाग एकत्र होकर अपनी भयंकर, विष-भरी बड़ी-बड़ी दाढ़ों से भीमसेन को बार-बार डँसने लगे।
वैशम्पायन उवाच