कर्णप्रवेशः—रङ्गे द्वन्द्वयुद्धप्रस्तावः तथा अङ्गराज्याभिषेकः
Karna’s Entry, Duel Proposal, and Consecration as King of Aṅga
वर्तमान: सतां वृत्ते पुत्रलाभमवाप्य च । पितृलोकं गत: पाण्डुरित: सप्तदशे5हनि,'साधु पुरुषोंके आचार-व्यवहारका पालन करते हुए राजा पाण्डु उत्तम पुत्रोंकी उपलब्धि करके आजसे सत्रह दिन पहले पितृलोकवासी हो गये
vartamānaḥ satāṃ vṛtte putralābham avāpya ca | pitṛlokaṃ gataḥ pāṇḍur itaḥ saptadaśe 'hani ||
सज्जनों के आचार-व्यवहार का पालन करते हुए, उत्तम पुत्रों का सौभाग्य प्राप्त कर, राजा पाण्डु पितृलोक को चले गए; यह आज से सत्रह दिन पूर्व हुआ।
वैशम्पायन उवाच