कर्णप्रवेशः—रङ्गे द्वन्द्वयुद्धप्रस्तावः तथा अङ्गराज्याभिषेकः
Karna’s Entry, Duel Proposal, and Consecration as King of Aṅga
(नकुल: सहदेवश्न तावप्यमिततेजसौ । पाण्डवौ नरशार्दूलाविमावपष्यपराजितौ ।।) चरता धर्मनित्येन वनवासं यशस्विना । नष्ट: पैतामहो वंश: पाण्डुना पुनरुद्धृत:,“इनके नाम हैं नकुल और सहदेव। ये दोनों भी अनन्त तेजसे सम्पन्न हैं। ये नरश्रेष्ठ पाण्डुकुमार भी किसीसे परास्त होनेवाले नहीं हैं। नित्य धर्ममें तत्पर रहनेवाले यशस्वी राजा पाण्डुने वनमें निवास करते हुए अपने पितामहके उच्छिन्न वंशका पुनः उद्धार किया है
vaiśampāyana uvāca | (nakulaḥ sahadevaś ca tāv apy amitatejasau | pāṇḍavau naraśārdūlāv imāv apaśya parājitau ||) caratā dharmanityena vanavāsaṃ yaśasvinā | naṣṭaḥ paitāmaho vaṃśaḥ pāṇḍunā punar uddhṛtaḥ ||
वैशम्पायन बोले—ये नकुल और सहदेव हैं; ये दोनों भी अमित तेज से सम्पन्न हैं। ये पाण्डवकुमार नरशार्दूल हैं, जिन्हें कोई परास्त नहीं कर सकता। नित्य धर्म में स्थित यशस्वी राजा पाण्डु ने वनवास करते हुए अपने पितामहों के लुप्तप्राय वंश का पुनरुद्धार कर दिया।
वैशम्पायन उवाच