तस्माज्जज्ञे महाबाहुर्भीमो भीमपराक्रम: । तमप्यतिबलं जात॑ वागुवाचाशरीरिणी,वायुदेवसे भयंकर पराक्रमी महाबाहु भीमका जन्म हुआ। जनमेजय! उस महाबली पुत्रको लक्ष्य करके आकाशवाणीने कहा--“यह कुमार समस्त बलवानोंमें श्रेष्ठ है। भीमसेनके जन्म लेते ही एक अद्भुत घटना यह हुई कि अपनी माताकी गोदसे गिरनेपर उन्होंने अपने अंगोंसे एक पर्वतकी चट्टानको चूर-चूर कर दिया। बात यह थी कि यदुकुलनन्दिनी कुन्ती प्रसवके दसवें दिन पुत्रको गोदमें लिये उसके साथ एक सुन्दर सरोवरके निकट गयी और स्नान करके लौटकर देवताओंकी पूजा करनेके लिये कुटियासे बाहर निकली। भरतनन्दन! वह पर्वतके समीप होकर जा रही थी कि इतनेमें ही उसको मार डालनेकी इच्छासे एक बहुत बड़ा व्याप्र उस पर्वतकी कन्दरासे बाहर निकल आया। देवताओंके समान पराक्रमी कुरुश्रेष्ठ पाण्डुने उस व्याप्रको दौड़कर आते देख धनुष खींच लिया और तीन बाणोंसे मारकर उसे विदीर्ण कर दिया। उस समय वह अपनी विकट गर्जनासे पर्वतकी सारी गुफाको प्रतिध्वनित कर रहा था। कुन्ती बाघके भयसे सहसा उछल पड़ी
tasmāj jajñe mahābāhur bhīmo bhīmaparākramaḥ | tam apy atibalaṃ jātaṃ vāg uvācāśarīriṇī ||
उसी (वायुदेव) से भयंकर पराक्रमी महाबाहु भीम उत्पन्न हुए। और उस अत्यन्त बलवान् बालक के जन्म लेते ही आकाशवाणी हुई— “यह कुमार बलवानों में श्रेष्ठ है।”
वैशम्पायन उवाच
Extraordinary power is presented as meaningful when it is rooted in a higher source and publicly oriented toward protection and dharma; Bhīma’s strength is introduced not as brute force but as a providential capacity meant for righteous ends.
Vaiśampāyana narrates Bhīma’s birth as the son of Vāyu and notes a heavenly, bodiless voice that immediately proclaims the newborn as supremely strong, marking him with an auspicious sign and foreshadowing his future role among the Pāṇḍavas.