पाण्डोः प्रेतकार्य-सम्पादनम्
Pāṇḍu’s Funeral Rites and Public Mourning
सर्वभूतहिते काले सर्वभूतेप्सिते तथा । को हि विद्वान् मृगं हन्याच्चरन्तं मैथुनं वने,जो सम्पूर्ण भूतोंके लिये हितकर और अभीष्ट है, उस समयमें वनके भीतर मैथुन करनेवाले किसी मृगको कौन विवेकशील पुरुष मार सकता है?
sarvabhūtahite kāle sarvabhūtepsite tathā | ko hi vidvān mṛgaṁ hanyāc carantaṁ maithunaṁ vane ||
जो समय समस्त प्राणियों के लिए हितकर और सबको अभीष्ट है, उस समय वन में मैथुनरत मृग को कौन विवेकशील पुरुष मार सकता है?
मृग उवाच