Ādi Parva, Adhyāya 115 — Mādri’s request; invocation of the Aśvins; birth and naming of the Pāṇḍavas
ततस्तांस्तेषु कुण्डेषु गर्भानवदधे तदा । स्वनुगुप्तेषु देशेषु रक्षां वै व्यद्धात् ततः,तत्पश्चात् गान्धारीने उन सभी गर्भोको उन पूर्वोक्त कुण्डोंमें रखा। वे सभी कुण्ड अत्यन्त गुप्त स्थानोंमें रखे हुए थे। उनकी रक्षाकी ठीक-ठीक व्यवस्था कर दी गयी
तत्पश्चात् गान्धारी ने उन सब गर्भों को उन कुण्डों में रख दिया। वे कुण्ड अत्यन्त गुप्त स्थानों में रखे गए, और फिर उनकी रक्षा की सम्यक् व्यवस्था कर दी गई।
वैशम्पायन उवाच