Ādi-parva 109: Pāṇḍu’s Forest Hunt and Kiṃdama’s Curse (पाण्डोर्मृगयावृत्तान्तः—किंदमशापः)
नाभवन् दस्यव: केचिन्नाधर्मरुचयो जना: । प्रदेशेष्वपि राष्ट्राणां कृतं युगमवर्तत,कोई भी मनुष्य डाकू नहीं था। पापमें रुचि रखनेवाले लोगोंका सर्वथा अभाव था। राष्ट्रके विभिन्न प्रान्तोंमें सत्ययुग छा रहा था
na abhavan dasyavaḥ kecin na adharma-rucayaḥ janāḥ | pradeśeṣv api rāṣṭrāṇāṁ kṛtaṁ yugam avartata ||
कहीं भी डाकू नहीं थे और अधर्म में रुचि रखने वाले लोग सर्वथा नहीं थे। राज्यों के विभिन्न प्रदेशों में मानो कृत (सत्य) युग ही छा गया था।
वैशम्पायन उवाच