Pāṇḍu’s Marriages, Conquests, and Triumphal Return (पाण्डोर्विवाह-विजय-प्रत्यागमनम्)
कथं चाराजंक राष्ट्र शक््यं धारयितु प्रभो । तस्माद् गर्भ समाधत्स्व भीष्म: संवर्धयिष्यति,प्रभो! तुम्हीं सोचो, बिना राजाका राज्य कैसे सुरक्षित और अनुशासित रह सकता है। इसलिये शीघ्र गर्भाधान करो। भीष्म बालकको पाल-पोसकर बड़ा कर लेंगे
kathaṃ cārājaṃka rāṣṭraṃ śakyaṃ dhārayituṃ prabho | tasmād garbhaṃ samādhatsva bhīṣmaḥ saṃvardhayiṣyati prabho ||
प्रभो! बिना राजा के राज्य को कैसे धारण किया जा सकता है? इसलिये शीघ्र गर्भाधान की व्यवस्था कीजिये; भीष्म उस बालक का पालन-पोषण करेंगे।
व्यास उवाच