आदि पर्व, अध्याय 104 — कर्णोत्पत्ति, दानधर्म, वैकर्तन-नामकरण
Karna’s Birth, Gift-Ethic, and the Name Vaikartana
राज्ये चैवाभिषिच्यस्व भारताननुशाधि च । दारांश्ष॒ कुरु धर्मेण मा निमज्जी: पितामहान्,“राज्यपर अपना अभिषेक करो और भारतीय प्रजाका पालन करते रहो। धर्मके अनुसार विवाह कर लो; पितरोंकोी नरकमें न गिरने दो”
rājye caivābhiṣicyasva bhāratān anuśādhi ca | dārānś ca kuru dharmeṇa mā nimajjīḥ pitāmahān ||
राज्य पर अपना अभिषेक कराओ और भारतवंशी प्रजा का शासन-पालन करो। धर्म के अनुसार विवाह करो; पितामहों को पतन में मत गिरने दो।
वैशम्पायन उवाच