Āṇīmāṇḍavya–Upākhyāna
The Account of Āṇīmāṇḍavya and the Birth of Vidura
ततः स पितुरर्थाय तामुवाच यशस्विनीम् । अधिरोह रथं मातर्गच्छाव: स्वगृहानिति,तत्पश्चात् भीष्म पिताके मनोरथकी सिद्धिके लिये उस यशस्विनी निषादकन्यासे बोले --“माताजी! इस रथपर बैठिये। अब हमलोग अपने घर चलें”
tataḥ sa pitur arthāya tām uvāca yaśasvinīm | adhiroha rathaṃ mātar gacchāvaḥ svagṛhān iti ||
तब पिता के प्रयोजन की सिद्धि के लिए उसने उस यशस्विनी कन्या से कहा—“माता, रथ पर आरूढ़ होइए; अब हम अपने गृह को चलें।”
वैशम्पायन उवाच